शुक्रवार, 3 जून 2022

03 जून : विश्व साइकिल दिवस पर विशेष : साइकिल और सतत विकास

इतिहास में ऐसा माना जाता है कि प्रागैतिहासिक काल में पहिए का आविष्कार हुआ था। पहिए के आविष्कार ने मानव जीवन की प्रगति और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। खासतौर पर आवागमन के साधानों के विकास और निर्माण में पहिए की भूमिका सराहनीय है। पहिए पर चलने वाले संसाधन जैसे-साइकिल, बैलगाड़ी, कार, बस, ट्रक, ट्रेन इत्यादि में पहिया केन्द्रीय भूमिका में होता है। आज हम बात करेंगे साइकिल की। क्योंकि प्रत्येक वर्ष 03 जून को विश्व साइकिल दिवस के रूप में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र आमसभा ने सन् 2018 में सर्वसम्मति से प्रत्येक वर्ष 03 जून को विश्व साइकिल दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। संयुक्त राष्ट्र ने सतत विकास के जलवायु परिवर्तन लक्ष्य को साधने के लिए साइकिल को महत्वपूर्ण साधन माना है। दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन में अनियमितता को ध्यान में रखते हुए साइकिल का प्रयोग निजी वाहन के तौर पर किया जाना एक महत्वपूर्ण संकल्प है। हममें से ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं होगा जिसने कभी साइकिल न चलाई हो? समाज में जब आवागमन के आधुनिक संसाधन नहीं थे तो साइकिल एक स्टेटस सिंबल हुआ करती थी। संभवतः साइकिल पहला निजी वाहन है। अखिल भारतीय साइकिल निर्माता संगठन के अनुसार वर्ष 2015 में भारत में साइकिल का वार्षिक उत्पादन 1.55 करोड़ था जो कि पूरे विश्व के वार्षिक साइकिल उत्पादन का दस प्रतिशत है। रिटेलर्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार भारत विश्व में साइकिल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। वर्ष 2020 में भारतीय साइकिल उद्योग में पन्द्रह से बीस प्रतिशत की वृद्धि हुई जो कि पूरी दशक की सबसे बड़ी वृद्धि हुई। इसका प्रमुख कारण था कोविड-19 महामारी। लोग अपनी सेहत के प्रति जागरूक हुए और साइक्लिंग एक महत्वपूर्ण विकल्प रहा। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय साइकिल उद्योग 2017-2030 के बीच 8.6 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ने के लिए तैयार है।
वर्तमान दौर में ईधन से चलने वाले निजी वाहनों की संख्या बेतहाशा बढ़ रही है। लोग अपने सुख सुविधा को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक परिवहन के बजाए निजी वाहनों का प्रयोग अधिक करते हैं। इससे प्रदूषण बढ़ता है और आर्थिक व्यय भी होता है। थोड़ी दूरी के लिए भी जहां साइकिल से आसानी से जाया जा सकता है और कार्य किये जा सकते हैं, वहां निजी वाहनों से लोग जाते हैं। सतत विकास के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए हमें इस मानसिकता को बदलना होगा। स्थानीय स्तर पर साइकिल के प्रयोग को बढ़ावा देना होगा। वर्तमान समय में लोग के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए साइक्लिंग को बढ़ावा मिल रहा है। यह एक सकारात्मक संकेत है। लेकिन यह प्रयास काफी नहीं है। आज मोटापा, बीपी, डायबिटिज, हाइपरटेंशन जैसी जीवन शैली से होने वाली बिमारियों और ऊर्जा स्रोतों की कमी को ध्यान में रखते हुए साइकिल की ओर लौटना होगा। शैक्षणिक संस्थानों, कार्यालयों इत्यादि में स्टाॅफ को साइकिल से आॅफिस आने-जाने हेतु प्रेरित करना चाहिए। आस-पास की जगहों पर आने-जाने के लिए साइकिल का प्रयोग किया जाना चाहिए। इससे एक ओर जहां प्रदूषण से निजात मिलेगा वहीं दूसरी ओर पेट्रोल डीजल जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों की बचत हो सकेगी। साथ ही आर्थिक बचत भी होगी। .......................................................... © डाॅ. गुरु सरन लाल, मोबाइल नं. 9131586112, ई-मेलः gurusaranlalofficial@gmail.com