सोमवार, 13 फ़रवरी 2023

विश्व रेडियो दिवस पर विशेष


रेडियो एक लोकप्रिय जनमाध्यम   

                  

        प्रत्येक वर्ष 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाया जाता है। इसक उद्देश्य दैनिक जीवन में संचार के शक्तिशाली माध्यम रेडियो के योगदान को याद करना है। इस वर्ष की थीम रेडियो और शांति है। विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, रेडियो दुनिया में सबसे विश्वसनीय और उपयोग किए जाने वाले मीडिया में से एक बना हुआ है। विश्व रेडियो दिवस 2023 पर, यूनेस्को ने स्वतंत्र रेडियो को युद्ध/संघर्ष की रोकथाम और शांति निर्माण के लिए एक स्तंभ के रूप में उजागर किया है। 


Painting: My daughter Aashvi Saran Gautam

        वर्तमान दौर में जनसंचार माध्यमों की भूमिका लोगों को सूचना, शिक्षा और मनोरंजन प्रदान करने तक ही सीमित नहीं है। वर्तमान वैश्विकरण के दौर में जनसंचार माध्यमों की भूमिका बढ़ी है। लोगों को जागरूक करने, प्रेरित, प्रोत्साहित करने, सामाजिक चेतना के विकास में जनसंचार माध्यमों की महती भूमिका है। रेडियो एक सस्ता व लोकप्रिय जनमाध्यम है। भारत में रेडियो के प्रसारण की शुरूआत भले ही मनोरंजन के उद्देश्य से रेडियो क्लबों द्वारा की गई, लेकिन समय के साथ-साथ रेडियो जनसंचार का एक महत्वपूर्ण और प्रभावी माध्यम बन गया है। रेडियो समाचार, समसामयिक विषयों पर  चर्चा-परिचर्चा, साक्षात्कार, रेडियो फीचर इत्यादि के माध्यम से रेडियो पत्रकारिता को बल मिला है। मनोरंजन के लिए गीत-संगीत के कलेवर में लिपटे हुए रेडियो कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है। रेडियो की अन्तर्वस्तु लोक कल्याणकारी होती है। लोगों को एकता के सूत्र में बांधता रेडियो देश की विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। भारत की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में निवास करती है। इन क्षेत्रों में रेडियो माध्यम सूचना का महत्वपूर्ण स्रोत है। 

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद रेडियो माध्यम को सरकार की नितियों और योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा। साथ ही बच्चों, महिलाओं, किसानों, जवानों के लिए कार्यक्रमों का प्रसारण किया गया। समय-समय पर गठित विभिन्न समितियों की अनुशंसाओं के आधार पर रेडियो की अन्तर्वस्तु एवं इसके प्रसारण में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिलते हैं। 

रेडियो प्रसारण की दृष्टि से इसे तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया जा सकता है-आकाशवाणी, एफएम रेडियो एवं सामुदायिक रेडियो। आकाशवाणी के कार्यक्रमों को मुख्यतः तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है- समाचार, संगीत तथा उच्चरित शब्द। एफएम के प्रसारण में सूचना और मनोरंजन का समन्वय किया गया है। इसके प्रसारण समय का 30 प्रतिशत समाचार तथा सामयिक कार्यक्रमों के लिए और 70 प्रतिशत मनोरंजन आधारित कार्यक्रमों के लिए है। सामुदायिक रेडियो, रेडियो का नया रुपान्तरण है। इसके माध्यम से अलग-अलग समुदाय के लोगों को सूचना, शिक्षा, जागरुकता, प्रेरणा आदि प्रदान करने का कार्य किया जाता है। इसके कार्यक्रम उस समुदाय की जरुरतों, समस्याओं और आवश्यकताओं के अनुरुप होते हैं। इसके माध्यम से धीरे-धीरे लोगों को विकास की मुख्य धारा में लाने का एक सफल प्रयास किया जा रहा है। 

एक तरफ जहां रेडियो माध्यम पर लोकसंगीत, लोक संस्कृति और भाषा को बनाए रखने की चुनौतियां हैं वहीं दूसरी तरफ नये माध्यम के दौर में अपनी प्रासंगिकता को भी बनाए रखने की चुनौती है। उम्मीद की जा सकती है कि उक्त चुनौतियों से निपटते हुए रेडियो विश्व में शांति स्थापित करने में अपनी भूमिका बखूबी निभायेगा।

                                                            -डॉ. गुरु सरन लाल