लेख
वन और स्वास्थ्य
प्रत्येक वर्ष 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य वनों के महत्व को उजागर करना और इसके प्रति लोगों को जागरूक करना है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 28 नवंबर, 2012 को एक प्रस्ताव पारित कर प्रत्येक वर्ष 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस मनाए जाने की अनुसंशा की। साथ ही प्रत्येक वर्ष एक थीम निर्धारित की जाती है। इस वर्ष की थीम ‘वन और स्वास्थ्य’ है। अर्थात् वनों का हमारे स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है या हमारे स्वास्थ्य को स्वस्थ रखने में वनों के महत्व को उजागर करना है।
यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि वनों से ही मानव जीवन है। वन हमें शुद्ध हवा, शुद्ध पानी, भोजन व जीवन रक्षक दवाएं, औषधियां, जड़ी बूटियां, उपयोगी फल-फूल इत्यादि प्रदान करते हैं। पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में वनों का बहुत महत्व है। वन कार्बन के प्रमुख स्रोत हैं। वन प्रबंधन वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों की समृद्धि और कल्याण में योगदान देते हैं। वन गरीबी उन्मूलन और सतत् विकास लक्ष्यों की उपलब्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फोटो स्रोतः गूगल
इन सभी अमूल्य पारिस्थितिक, आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य लाभों के बावजूद वैश्विक वनों की कटाई खतरनाक दर से जारी है। शहरीकरण और आधुनिकीकरण के लिए वनों की कटाई की प्रक्रिया को हतोत्साहित करने का एक प्रयास है। वनों की कटाई से ब्रह्माण्ड की सुन्दरता का नष्ट हुई ही है साथ ही वैश्विक जलवायु परिवर्तनों को असंतुलित किया है।
वनों के संरक्षण व संवर्धन में वन अनुसंधान संस्थानों, वन अधिकारियों, विभिन्न विश्वविद्यालयों के वानिकी विभागांे, तमाम सरकारी योजनाओं, कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका है। गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका की भी सराहना की जानी चाहिए। भारत में 2019 की अपेक्षा वर्तमान में वन क्षेत्रफल में वृद्धि हुई है। यह सकारात्मक प्रयास है। लेकिन सड़क, हाईवे, बिल्डिंग या दूसरी अधोसंरचना के विकास हेतु वनों की कटाई चिंताजनक है।
यदि हमने केवल वनों को बचा लिया तो आने वाली पीढ़ियों के लिए सतत विकास की राह और आसान हो जाएगी। साथ ही सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में आसानी होगी।
-डाॅ. गुरु सरन लाल
