मंगलवार, 1 अगस्त 2023

डिजिटल मीडिया के दौर में फोक मीडिया की चुनौतियां

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डिजिटल मीडिया के दौर में फोक मीडिया की चुनौतियां


         फोक मीडिया समूह संचार या सामुदायिक संचार का सबसे पुरातन और प्रभावी संचार माध्यम है। फोक मीडिया के माध्यम से छोटे-छोटे समूह में जन जागरुकता संबंधी संदेशों को आसानी से, प्रभावशाली तरीके से पहुंचाया जा सकता है। न सिर्फ समूह संचार बल्कि व्यापक स्तर पर भी इसका असर देखा गया है। फोक मीडिया के अन्तर्गत लोकगीत, लोकसंगीत, लोक नृत्य, नुक्कड़ नाटक, कठपुतली, लोक कथा, लोक गाथा इत्यादि शामिल होते हैं। प्राचीन काल से ही इन कलाओं का समाज में बहुत महत्व रहा है। ये लोगों की रूचियों और परंपराओं में रचे-बसे माध्यम हैं। लोक माध्यमों की लोकप्रियता का वर्णन करते हुए सीन मैकब्राइट ने कहा था कि जन सामान्य के प्रति अपने व्यापक आकर्षण और लाखों निरक्षर लोगों के गहनतम संवेगों को छूने के अपने गुण की दृष्टि से गीत और नाटक का माध्यम अद्वितीय है। 

भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अन्तर्गत गीत एवं नाटक प्रभाग का कार्य लोक कलाकारों की खोज करना, उन्हें प्रोत्साहन देना और उन्हें मंच प्रदान करना है। फोक मीडिया के कलाकारों को सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है। स्पीकमैके जैसी निजी संस्थाएं और सोसाइटी भी अपने स्तर पर लोक कलाओं के प्रचार-प्रसार का कार्य कर रही हैं और कलाकारों को मंच प्रदान किये जा रहे हैं। लोकगीत-संगीत, नुक्कड़ नाटक, कठपुतली नृत्य इत्यादि का प्रदर्शन किया जाता है। सोसाइटी फाॅर प्रमोशन आॅफ इण्डियन कल्चर एमंग यूथ-यह संस्था भी लोक संचार के प्रति लोगों को प्रेरित करती है। जहां कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। यह उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। नशा, मद्यपान, निरक्षरता, अंधविश्वास, सामप्रदायिक वैमनस्य (भेदभाव), कुपोषण जैसी ज्वलंत समस्याओं के निराकरण के लिए लोक माध्यमों का सार्थक उपयोग किया जा रहा है। 1972 के यूनेस्को रिपोर्ट में कहा गया है कि पारंपरिक माध्यम, व्यावहारिक परिवर्तन लाने और निचले स्तर पर विभिन्न समुदायों को समकालीन मुद्दों के प्रति जागरूक करने में जीवंत भूमिका निभाते हैं। 


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जैसा होता आया है कि नया माध्यम पुराने माध्यम का स्थान लेता है। स्थान न भी लेता हो, तो भी उसे प्रभावित अवश्य करता है। वर्तमान डिजिटल समय में फोक मीडिया और इसके कलाकारों के समक्ष काफी चुनौतियां हैं। डिजिटल मीडिया का अपना आकर्षण है और इसके प्रति लोगों की दीवानगी देखते बनती है। वहीं दूसरी तरफ फोक मीडिया को पुराना माध्यम माना जाता है जबकि इसकी प्रभावशीलता और पहुंच काफी अधिक है। फोक मीडिया संवेदनाओं को उकेरने का कार्य आसानी से करता है। मीडिया मिक्स के इस दौर में फोक मीडिया की अन्तर्वस्तु को आसानी से सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफाॅर्म के माध्यम से प्रचारित प्रसारित किया जा सकता है। ब्लाॅग, वेबपोर्टल, यूट्यूब चैनल आदि के माध्यम से फोक मीडिया के कार्यक्रमों या अन्तर्वस्तु को लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे सबसे अधिक प्रभावित युवा पीढ़ी होगी। 

हम कितने भी डिजिटल हो जाएं लेकिन मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने तथा अपनी जड़ों से जुड़े रखने में फोक मीडिया का कोई मुकाबला नहीं है। भारत जैसे विकासशील देश में सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक इत्यादि आधारों पर समाज के समग्र विकास में लोक माध्यम अपनी महती भूमिका निभा सकते हैं बशर्ते इस पर पूरा ध्यान दिया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत लोगों को जागरूक करने, अनौपचारिक शिक्षा देने, प्रेरित प्रोत्साहि करने में ये माध्यम सस्ते, सुलभ और प्रभावशाली हैं। 

                                                                                  -डाॅ. गुरु सरन लाल

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