गुरुवार, 8 सितंबर 2022

08 सितम्बर : विश्व साक्षरता दिवस पर विशेष

संपूर्ण साक्षरता की राहें आसान नहीं प्रत्येक वर्ष 08 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाया जाता है। यूनेस्को ने 1965 में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का निर्णय लिया था और 08 सितंबर 1966 से यह दिवस प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है। भारत में वर्ष 2002 में शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार में शामिल किया गया। इसके बाद शिक्षा के अधिकार अधिनियम के माध्यम से 6 वर्ष से 14 वर्ष के बच्चों के लिए शिक्षा अनिवार्य कर दिया गया। साक्षर की परिभाषा के अनुसार सात साल या इससे ऊपर का व्यक्ति जो किसी भी भाषा में पढ़ लिख सकता है, वह साक्षर है। लेकिन वह व्यक्ति जो केवल पढ़ सकता है लेकिन लिख नहीं सकता, वह साक्षर नहीं है। 1991 की जनगणना से पहले यह यह आयु पांच वर्ष थी।
आंकड़ों की बात करें तो 2011 में भारत की जनगणना दर जहां 74.4 प्रतिशत थी वहीं नेशनल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार 2022 में साक्षरता दर 77.7 प्रतिशत है। यह रफ्तार बहुत धीमी है। ज्ञातव्य हो कि संयुक्त राष्ट्र ने सतत विकास के 17 लक्ष्यों में शिक्षा को भी शामिल किया है और यह लक्ष्य 2030 तक पूरा करना है। यह बहुत बड़ा लक्ष्य है। शिक्षा को संवर्ती सूची में रखा गया है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को इस विषय पर कानून बनाने का अधिकार है। राष्ट्रीय साक्षरता मिशन, सूचना का अधिकार अधिनियम और केंद्र और राज्य सरकारों के तमाम प्रयासों के बाद भी संपूर्ण साक्षरता का सपना हाल फिलहाल साकार होता नहीं दिख रहा है। इस पथ में आर्थिक पिछड़ापन,संसाधनों की कमी, बाल मजदूरी, राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी सहित सामाजिक, भौगोलिक आदि प्रमुख बाधाएं हैं. हम सभी को मिलजुलकर प्रयास करने होंगे. लेखक: डॉ.गुरु सरन लाल, एसोसिएट प्रोफेसर, पत्रकारिता एवं जनसंचार संकाय, भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग (छत्तीसगढ़)