लेख
आजादी के 75 वर्ष और मीडिया
विगत 15 अगस्त 2022 को भारत देश की आजादी के 75 वर्ष पूरे हो गए हैं। ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अन्तर्गत पूरे वर्ष भर बड़ी धूमधाम से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। आजादी के इन 75 वर्षों में भारत में बहुत परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। परिवर्तन सभी क्षेत्रों में देखा जा सकता है। मीडिया के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहे हैं। लोकतंत्र के चैथे स्तंभ के रूप में मीडिया की जिम्मेदारी विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका से कम नहीं है। स्वतंत्रता पूर्व मीडिया एक मिशन था, लेकिन स्वतंत्रता उपरांत यह प्रोफेशन में बदल गया है। बदलाव जरूरी भी है। मीडिया के रूप, स्वरूप, कंटेंट, प्रस्तुतिकरण, फीडबैक मेकेनिज्म, ऑडियंस सर्वे इत्यादि में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहे हैं। समय के साथ जहां पुराने मध्यमों का प्रभाव कम हुआ है और अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है वहीं नए माध्यमों का प्रादुर्भाव भी हुआ है। इंटरनेट के आविष्कार के उपरांत अस्तित्व में आये ‘न्यू मीडिया’ या डिजिटल मीडिया ने बहुत कम समय में लोगों के दिलों में जगह बना ली है। संचारविद मार्शल मैकलुहान के ग्लोबल विलेज की अवधारणा को साकार करता हुआ न्यू मीडिया बहुत प्रचलित हो गया है और प्रभावी भी। सूचनाओं का बहुत कम समय में बल्कि कहा जाए कि रियल टाइम में अधिक से अधिक लोगों तक सम्प्रेषित करना संभव हो गया है।
पिछले 75 वर्षों में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और फोक मीडिया की अंतर्वस्तु, प्रस्तुति, प्रभाव में परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। एक ओर जहां प्रिंट मीडिया में बेहतर डिजाइन एवं कलर के साथ समाचार सामग्रियां प्रस्तुत की जा रही हैं वहीं इलेक्ट्रानिक मीडिया की अन्तर्वस्तु की प्रस्तुति नये कलेवर व नए कान्सेप्ट के साथ की जा रही है। ये अन्तर्वस्तु लोगों की रूचि व आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। हालांकि सभी माध्यमों के लिए यह कहना उचित नहीं होगा।
विज्ञापन और जनसंपर्क के क्षेत्र में आए बदलावों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि इंटरनेट आधारित अन्तर्वस्तु बढ़ी है। ऑनलाइन विज्ञापन या ई-विज्ञापनों में बेतहासा वृद्धि हुई है। टेक्ट्स, पिक्चर, ऑडियो-विजुअल से सजे हुए ऑनलाइन विज्ञापन लगभग सभी वेबसाइट, वेबपोर्टल, सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहे हैं। इससे एक तरफ जहां लोगों को प्रोडक्ट, सर्विस या आइडिया के बारे में पता चलता है वहीं ये विज्ञापन वेबसाइट या वेबपोर्टल की आय के साधन भी होते हैं। किसी प्रोडक्ट, सर्विस या आइडिया के बारे में ऑनलाइन सर्वे भी संचालित किये जा रहे हैं। जनसंपर्क के क्षेत्र में नये-नये पीआर टूल्स का उपयोग होने लगा है। सोशल मीडिया का भी उपयोग होने लगा है।
मनोरंजन जगत में ओटीटी प्लेटफाॅर्म एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ओटीटी पर वेब सीरीज, फिल्में, धारावाहिक, कार्टून फिल्में इत्यादि सामग्रियां उपलब्ध हैं। लोग अपने स्मार्टफोन या टीवी पर इन सामग्रियों का आनंद ले रहे हैं।
वर्तमान समय में सोशल मीडिया व डिजिटल मीडिया से नागरिक पत्रकारिता को बढ़ावा मिला है। साथ ही आम लोग भी समाचार सामग्रियों, समसामयिक विषयों व घटनाओं पर अपनी राय रख रहे हैं। खबरों का फाॅलोअप भी बढ़ा है। जिन मुद्दों व विषयों को मुख्यधारा की मीडिया नजरअंदाज करती है या कवरेज नहीं करती उन पर भी सोशल मीडिया के माध्यम से लोग अपनी बात रखते हैं।
लेखकः डाॅ. गुरु सरन लाल
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