शुक्रवार, 18 अगस्त 2023

लेख: पत्रकारिता में फोटोग्राफ की प्रासंगिकता



पत्रकारिता में फोटोग्राफ की प्रासंगिकता

 
पत्रकारिता जगत में फोटोग्राफ का बहुत महत्व है। इससे समाचार की प्रमाणिकता आसानी से हो जाती है, वहीं दूसरी तरफ इसका आकर्षण भी समाचार सामग्री को पठनीय व दर्शनीय बना देता है। समाचार-पत्र व पत्रिकाओं में शुरुआत से ही समाचारों के साथ उससे संबंधित फोटोग्राफ के प्रकाशन का चलन रहा है। फोटोग्राफ की महत्ता को देखते हुए समाचार पत्र व पत्रिकाओं के कार्यालयों में स्वतंत्र रूप से फोटो पत्रकार की नियुक्ति की जाती है। 
प्रत्येक वर्ष 19 अगस्त को विश्व फोटोग्राफी दिवस मनाया जाता है। यह दिवस उन सभी फोटोग्राफर को समर्पित है जिन्होंने अपनी कला से दुनिया की खूबसूरती को कमरे में कैद किया है। यह दिन फोटोग्राफी के महत्व को समझने और फोटोग्राफर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी दिन है। इसी दिन फ्रांस सरकार ने डागोरोटाइप  फोटोग्राफी तकनीक के आविष्कार की घोषणा की थी। इसका आविष्कार जोसेफ नाइसफोर और लुइस डागेर नाम के दो वैज्ञानिकों ने की थी।
Photo courtesy: Google

फ्रेड आर बर्नार्ड के अनुसार एक अच्छी फोटो एक हजार लिखे गए शब्दों से भी अधिक प्रभावी होती है। जिस शिद्दत से फोटो मानवीय संवेदनाओं को उकेर सकती है, झकझोर सकती है, शायद उतनी ताकत लिखे गए शब्दों में भी नहीं होती। भाउकता के क्षणों के फोटो जैसे किसी दुर्घटना, आपदा, विवशता, लाचारी इत्यादि के भावों को एक फोटो आसानी से अभिव्यक्त कर सकती है। समय के साथ फोटोग्राफी में भी विशेषज्ञता का चलन बढ़ा है। वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी, फैशन फोटोग्राफी, वेडिंग फोटोग्राफी स्पोर्ट्स फोटोग्राफी, स्ट्रीट फोटोग्राफी, ड्रोन फोटोग्राफी , सेल्फी फोटोग्राफी इत्यादि। फोटो फीचर का भी बहुत महत्व है। किसी एक फोटो को कम से कम शब्दों में बयां करना और अधिकतर बातें फोटो ही बयां कर दें, उसे फोटो फीचर कहा जाता है। यह चलन भी पत्रकारिता में बहुत पहले से है और वर्तमान में बढ़ गया।
फोटोग्राफी के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। अगर अच्छा विजन है और चीजों को बारीकी से देखने की कल्पना शक्ति है तो यह क्षेत्र अपार संभावनाएं लिए हुए है। साथ ही अच्छी कमाई भी होती है। वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी और फैशन फोटोग्राफी के प्रोजेक्ट लाखों में होते हैं। एक तरफ जहां फोटोग्राफी में अपार संभावनाएं हैं तो चुनौतियां भी कम नहीं हैं। विभिन्न सॉफ्टवेयर के माध्यम से फोटो को आकर्षक हुआ प्रकाशन/ प्रसारण योग्य बनाया जाता है तो दूसरी तरफ से फेक फोटो भी एक बड़ी चुनौति है। फोटो के माध्यम से ब्लैकमेलिंग भी एक चुनौति है।  सोशल मीडिया व सेल्फी फोटोग्राफी के इस दौर में फोटोग्राफ को बहुत आसानी से लाखों लोगों तक एक साथ पहुंचाया जा सकता है। बदलते दौर में पत्रकारिता के क्षेत्र में फोटोग्राफी आज भी बहुत प्रासंगिक है। यह फेक न्यूज़ को पता लगाने में भी बहुत सहायक है।
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*लेखक डॉ. गुरु सरन लाल, एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, पत्रकारिता एवं जनसंचार संकाय, भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग (छत्तीसगढ़)*

2 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

Very good

बेनामी ने कहा…

एक फोटो से स्वयं की पहचान भी हो पाती है। बहुत अच्छा लेख। बधाई