गुरुवार, 15 सितंबर 2022
लोकतंत्र को सशक्त बनाने में मीडिया की भूमिका
अन्तरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस पर विशेष
आज अन्तरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस है। वर्ष 2008 से प्रत्येक वर्ष यह दिवस 15 सितम्बर को मनाया जाता है। वर्ष 2022 की थीम है- लोकतंत्र, शांति और सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए मीडिया की स्वतंत्रता का महत्व
मीडिया को लोकतंत्र का चैथा स्तंभ कहा जाता है। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बाद लोकतंत्र में मीडिया का महत्पवूर्ण स्थान है। मीडिया लोकतंत्र की सभी स्थितियों व प्रक्रियाओं में एक सजग प्रहरी की तरह वाॅच डाग का कार्य करती है। चुनाव या मतदान, सरकार का गठन, लोकसभा, राज्यसभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं की कार्यवाही और लिये गए निर्णय को जन जन तक पहुंचाने का कार्य मीडिया करती है। सभी प्रक्रियाओं व स्थितियों की समस्त जानकारियां मीडिया द्वारा लोगों को प्रदान की जाती हैं।
चुनाव के दौरान अधिसूचना जारी होते ही विभिन्न मुद्दों और विषयों पर पब्लिक ओपिनियन बनाने का कार्य मीडिया करता है। महान संचारविद् मैक्सवेल मैककाॅम और डोनाल्ड एल शाॅ ने मीडिया का एजेंडा सेटिंग सिद्धान्त दिया है। इस सिद्धान्त के अनुसार मीडिया को इससे कुछ ज्यादा मतलब नहीं होता कि लोग क्या सोचते हैं, बल्कि मीडिया यह जानना चाहता है कि उसने जो एजेंडा तय किया है उसके बारे में लोग क्या सोचते हैं। यह बात चुनावों के दौरान मीडिया में देखी जा सकती है। हालांकि यह सिद्धान्त 1972 के अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव के परिणामों पर आधारित था लेकिन यह अन्य देशों के लिए भी उतना ही सही है।
मतदान उपरान्त सरकार के गठन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी भी मीडिया प्रस्तुत करता है। सरकार गठन के उपरांत यदि सत्तारूढ़ पार्टी अपने चुनावी घोषणा-पत्र में दिए गए वादों को पूरा नहीं करती है तो मीडिया सवाल उठाता है। इसी तरह लोकसभा, राज्यसभा व विधानसभाओं के विभिन्न सत्रों की कार्यवाही की पूरी जानकारी व समीक्षा मीडिया प्रस्तुत करता है। किसी विवाद की स्थिति में भी मीडिया निष्पक्ष होकर अपनी राय व्यक्त करता है। सभी पहलुओं से रिपोर्टिंग करता है।
एक सशक्त लोकतंत्र के लिए यह आवश्यक है कि वहां मीडिया स्वतंत्र और निष्पक्ष हो। जब मीडिया स्वतंत्र और निष्पक्ष होगी तो सूचना का समान प्रवाह सुनिश्चित हो पाता है। तानाशाही या गैर-लोकतांत्रित देशों मंे सबसे पहले मीडिया पर लगाम कसा जाता है। क्योंकि मीडिया अगर नियंत्रण में रहेगी तो वे मनचाहे निर्णय ले पाएंगे। स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान प्रेस पर नियंत्रण करने के लिए अंग्रेजी हूकूमत ने गैंगिंग एक्ट लागू किया। इसके बाद न जाने कितने अखबारों पर छापा मारकर उसे बंद कर दिया गया। पत्रकारों को जेल में डाल दिया गया। इसका एक उद्देश्य था कि सूचनाओं के प्रवाह को रोकना।
वर्तमान सूचनाक्रांति के युग में किसी देश के शक्तिशाली होने का पैमाना यह नहीं रह गया है कि उसके पास कितने हथियार हैं या कितनी बड़ी सेना है। बल्कि उसके पास कितनी अधिक सूचनाएं हैं, इससे कोई देश शक्तिशाली कहा जा रहा है। इसलिए मीडिया की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि सूचनाएं समान रूप से सभी को उपलब्ध हों। यह एक सशक्त लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण शर्त होनी चाहिए।
प्रेस के चार सिद्धान्तों में लोकतांत्रिक सहभागिता का सिद्धान्त भी है। इसमें कहा गया है कि मीडिया का कार्य लोगों को सिर्फ सूचना शिक्षा और मनोरंजन प्रदान करना नहीं है बल्कि लोकतंत्र को बनाए रखने व इसे मजबूत बनाने में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देना है।
लोकतंत्र को बनाए रखने और इसे और मजबूत बनाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। जब तक मीडिया स्वतंत्र और निष्पक्ष है, तब तक यह विश्वास किया जा सकता है कि लोकतंत्र पर कोई आंच नहीं आने पाएगी।
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लेखक-डाॅ. गुरु सरन लाल, सह-प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, पत्रकारिता एवं जनसंचाार विभाग, भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग (छ.ग.)
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2 टिप्पणियां:
हार्दिक बधाई सर
बहुत बहुत धन्यवाद सर
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