लेख
*जनसंपर्क के क्षेत्र में नई प्रवृत्तियां*
प्रत्येक वर्ष 21 अप्रैल को राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस मनाया जाता है। पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (पी.आर.एस.आई.) द्वारा 1986 में यह निर्णय लिया गया कि प्रत्येक वर्ष 21 अप्रैल को राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस मनाया जाएगा। पीआरएसआई, जनसंपर्क प्रैक्टिशनर्स का एक राष्ट्रीय संघ है जिसकी स्थापना 1958 में जनसंपर्क को एक पेशे के रूप में मान्यता को बढ़ावा देने और एक रणनीतिक प्रबंधन कार्य के रूप में जनसंपर्क के उद्देश्यों और संभावनाओं को विस्तार देने के लिए की गई थी। वर्ष 2023 की थीम ‘जी-20 और भारतीय मूल्यः जनसंपर्क परिप्रेक्ष्य’ रखा गया है।
जनसंपर्क एक प्रबंधकीय कार्य है। जनसंपर्क मूलरूप से पत्रकारिता एवं जनसंचार का एक स्वरूप है, जिसके माध्यम से किसी संस्थान या व्यक्ति की छवि निर्माण करने, मीडिया रिलेशन बनाने जैसे कार्य किये जाते हैं। जनसंपर्क के प्रकारों की बात की जाए तो केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों के जनसंपर्क, कार्पोरेट जनसंपर्क, राजनीतिक जनसंपर्क, व्यक्तिगत जनसंपर्क, निजी संस्थानों के जनसंपर्क इत्यादि आते हैं।
शुरूआत में जनसंपर्क का क्षेत्र प्रेस-विज्ञप्ति तैयार करने, प्रेस कांफ्रेंस आयोजित करने, हाऊस जर्नल प्रकाशित करने तक सीमित था लेकिन वर्तमान में जनसंपर्क के रूप और स्वरूप में बहुत बदलाव देखने को मिलते हैं। ये बदलाव मीडिया के रूपों में आए बदलाव के कारण भी है। वर्तमान में जनसंपर्क के अन्तर्गत प्रेस-विज्ञप्ति तैयार करना, प्रेस कांफ्रेंस आयोजित करना, स्वस्थ मीडिया रिलेशन बनाना, प्रेस विजिट आयोजित करना, विज्ञापन जारी करना इत्यादि कार्य के साथ ही विभिन्न डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी लगातार जुड़े रहना व अपडेट देना भी जनसंपर्क का कार्य है। आंतरिक व बाह्य पब्लिक से लगातार संपर्क व संवाद बनाए रखना। डैमेज कंट्रोल व विपदा नियंत्रण करने हेतु भी जनसंपर्क का उपयोग किया जाता है। वर्तमान में एक जनसंपर्क अधिकारी की भूमिका व कार्यक्षेत्र बढ़ गया है। उसे एक साथ पत्रकार और संचारक दोनों ही भूमिकाएं निभानी पड़ रही हैं।
विभिन्न संस्थान या विभाग का अपना ट्विटर हैंडल, यूट्यूब चैनल, फेसबुक एकाउंट व फेसबुक पेज, इंस्टाग्राम पर एकाउंट, वेबपोर्टल, वेबसाइट इत्यादि प्लेटफाॅर्म हैं, जहां सभी सूचनाएं अद्यतन मिल जाती हैं। जनसंपर्क विभाग लगातार इन सूचनाओं को अपडेट करता है। प्रेस-विज्ञप्ति, सूचना, बैठक सूचना इत्यादि की जानकारियां आसानी से मिल जाती हैं।
वर्तमान सूचना और प्रौद्योगिकी के दौर में जब झूठी व निराधार सूचनाएं, अफवाहें, प्रोपेगेण्डा आसानी से फैलाये जाने की संभावना अधिक है, ऐसे में इसे रोकने में जनसंपर्क विभाग की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। किसी भी ऐसी स्थिति से निपटने की जिम्मेदारी भी जनसंपर्क अधिकारी व जनसंपर्क विभाग की है कि समय रहते सत्य को लोगों तक पहुंचाया जाए। नहीं तो संस्थान की छवि को नुकसान हो सकता है। ब्रांड इमेज आसानी से नहीं बनती। क्राइसिस मैनेजमेंट का कार्य भी जनसंपर्क विभाग द्वारा किया जाता है। यदि एक बार छवि खराब हो जाए तो सालों लग जाते हैं इसे बनाने में। वैसे क्राइसिस कम्युनिकेशन, संचार के एक नए क्षेत्र के रूप में विकसित हो रहा है जिस पर अध्ययन और शोध जारी है।
बदलते दौर में जनसंपर्क का दायरा बढ़ा है। इसके स्वरूप में भी परिवर्तन आए हैं। एक बेहतर जनसंपर्क के लिए जरूरी है कि वह समय के साथ-साथ अपने में बदलाव लाए। नई-नई सूचना व संचार प्रौद्योगिकी के अनुरूप अपनी अन्तर्वस्तु का निर्माण, चयन व उसका प्रचार-प्रसार करे। फेक न्यूज से जूझते हुए सत्य बात को लोगों तक पहुंचाना व उन्हें विश्वास में लेना सबसे बड़ी चुनौति है।

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