रविवार, 23 अप्रैल 2023

किताबों की दुनिया

    किताबों की दुनिया, ज्ञान की दुनिया है। अनुभवों की दुनिया है। ऐसी दुनिया जहां कल्पनाएं हैं, सपने हैं और उन सपनों को साकार करने के रास्ते भी हैं। ऐसी दुनिया जहां जीवन है, संबंध है, प्रेरक-रोचक किस्से हैं, इतिहास है, साहित्य है, संगीत है। खुशनशीब हैं वे लोग जिनके हाथों में किताबें हैं। जो पढ़-लिख सकते हैं। 


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किताबें हमारे विचारों को, कल्पनाओं को, अनुभवों को, सोचने-समझने के दायरे को नया आकाश देती हैं। नया विस्तार देती हैं। एक लेखक अपने ज्ञान और अनुभव को किताब के रूप में सामने लाता है। जिन किताबों को हम दो-तीन दिन में पढ़ लेते हैं, उनको लिखने में दो-तीन साल, कभी-कभी पांच-दस साल लग जाते हैं। किताबों में जो ज्ञान है वह कभी नष्ट नहीं होता। समय के साथ-साथ, अपने पाठकों के माध्यम से उसका भी विस्तार होता जाता है। 
किताबों व लेखकों के महत्व को बताने के लिए साथ ही काॅपीराइट के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक एवं काॅपीराइट दिवस मनाया जाता है। प्रत्येक वर्ष एक थीम निर्धारित की जाती है। वर्ष 2023 की थीम है- स्वदेशी भाषाएं। किताबों का प्रचार करने, 
समय के साथ किताबों के रूप व स्वरूप में परिवर्तन आए हैं। ये परिवर्तन नई सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के कारण हैं। वर्तमान में प्रकाशित किताबों के साथ ही ई-बुक यानि इलेक्ट्राॅनिक किताबों का चलन बढ़ गया है। आप अपने फोन या टैबलेट के माध्यम से किताबों को पढ़ सकते हैं। 
समय के साथ-साथ पुस्तकालयों में भी आमूलचूक परिवर्तन देखे जा सकते हैं। अब ई-लाइब्रेरी, डिजिटल,  ऑनलाइन लाइब्रेरी की भी सुविधा उपलब्ध है। इंटरनेट आविष्कार के बाद निर्मित वैश्विक ग्राम में आप दुनिया के किसी भी लाइब्रेरी की सदस्यता ले सकते हैं और किताबें पढ़ सकते हैं। समय सीमा की भी कोई समस्या नहीं है। आप जब चाहें किताबें उपलब्ध हैं। सातों दिन, चैबिसों घंटे। 
पुस्तकों व लेखकों के बारे में प्रचार-प्रसार करने में पुस्तक मेलों का भी महत्व कम नहीं हैं। राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले इन पुस्तक मेलों में केेवल किताबों पर ही बातें नहीं होतीं। लेखकों, प्रकाशकों से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर भी सभा-संगोष्ठी होती है। यह एक अवसर होता है जब पाठक अपने पसंदीदा लेखक से रूबरू होकर, अपने प्रश्न पूछे सकता है। गुफ्तगू कर सकता है। नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा विभिन्न देश के विभिन्न शहरों में पुस्तक मेलों का आयोजन किया जाता है। साथ ही विभिन्न प्रकाशकों, संगठनों, समूहों द्वारा भी ऐसे प्रयास किये जाते हैं। 
मौलिक ज्ञान का अपना महत्व है। मौलिक रचनाएं पाठकों को बहुत प्रभावित करती हैं। रचनाओं की मौलिकता व लेखकों के अधिकारों को संरक्षित करने के उद्देश्य से काॅपीराइट एक्ट को लागू किया गया। कोई भी किताब या रचना पर उसके लेखक का अधिकार होता है। उसने बड़ी तपस्या से किताब लिखी होती है। ऐसे में लेखक के अधिकारों के संरक्षण के लिए काॅपीराइट एक्ट एक महत्वपूर्ण जरिया है। 
हमें रोज कुछ नया पढ़ना चाहिए और कुछ नया लिखना चाहिए। इससे न सिर्फ हमारी रचनात्मकता बरकरार रहती है बल्कि हम दुनिया को कुछ नया दे रहे होते हैं। विश्व पुस्तक एवं काॅपीराइट दिवस पर यही कामना है कि किताबों को उनके पाठक मिलें। लेखकों-प्रकाशकों का उत्साह बना रहे और वे नित नया ज्ञान सृजित करते रहें। ज्ञान की परंपरा कायम रहे। 
   -डॉ. गुरु सरन लाल 

1 टिप्पणी:

बेनामी ने कहा…

Good