Article published in Bharat Bhaskar Newspaper on 15.04.2023
लेख
लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देती नागरिक पत्रकारिता
-डाॅ. गुरु सरन लाल
किसी भी लोकतांत्रिक देश में नागरिक महत्वपूर्ण होते हैं। प्रत्येक नागरिक बराबर होता है और सारे नियम-कायदे सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। भारत में मीडिया या पत्रकारिता को वही वाक् एवं अभिव्यक्ति का अधिकार प्राप्त है जो आम लोगों को है। सूचनाओं या समाचारों के प्रकाशन-प्रसारण और वितरण का अधिकार आम लोगों को भी वही है जो मीडिया को है। एक समय था जब ‘न्यूज-ब्रेक’ करना केवल मुख्यधारा की मीडिया का काम था। आम लोगों को इसका पता तब चलता था जब समाचार प्रकाशित या प्रसारित हो जाते थे। लेकिन न्यू मीडिया या डिजिटल मीडिया के प्रादुर्भाव से नागरिक पत्रकारिता को बल मिला है। अब मुख्यधारा के समानांतर ही एक वैकल्पिक मीडिया कार्य कर रहा है जिसे नागरिक पत्रकारिता कहा जाता है। अब सूचनाएं वैकल्पिक मीडिया द्वारा भी ‘न्यूज-ब्रेक’ की जाती हैं। नागरिक पत्रकारिता कोई नया शब्द नहीं है। समाचार-पत्रों में ‘संपादक के नाम पत्र’ के प्रकाशन से इसकी शुरूआत माना जाता है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की लोकतंत्र की परिभाषा से नागरिक पत्रकारिता को समझा जा सकता है। उनके अनुसार लोकतंत्र जनता का, जनता के लिए जनता द्वारा शासन है। इसी तरह नागरिक पत्रकारिता, नागरिकों द्वारा नागरिकों के लिए नागरिकों की पत्रकारिता कहा जा सकता है। स्माॅर्टफोन के उपभोक्ताओं की बढ़ती संख्या और इंटरनेट की उपलब्धता ने नागरिक पत्रकारिता को और मजबूत बना दिया है। वेबपोर्टल, ब्लाॅग, यूट्यूब चैनल, सोशल नेटवकिंग साइट्स जैसे ट्वीटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम इत्यादि पर विभिन्न विषयों व मुद्दों से संबंधित लगातार कंटेट उपलब्ध हो रहे हैं। दूरदराज क्षेत्रों की खबरें भी मिल रही हैं जहां आमतौर पर मुख्यधारा की मीडिया की पहुंच नहीं होती। पहुंच होती भी है तो लाभ या विज्ञापन की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं होती है। डिजिटल मीडिया ने शिक्षित या अशिक्षित, सामान्य व्यक्ति या दिव्यांग का भेद खत्म कर दिया है क्योंकि इसकी अन्तर्वस्तु लिखे गये शब्दों, फोटोग्राफ, दृश्य-श्रव्य, एनिमेशन, काॅर्टून इत्यादि रूपों में उपलब्ध है जिसे आसानी से समझा जा सकता है। नागरिक पत्रकारिता निचले तबके और हासिए के लोगों की आवाज बनकर उभरा है।
नागरिक पत्रकारिता या वैकल्पिक मीडिया में समाचारों का फाॅलोअप लगातार होता रहता है। मुख्यधारा की मीडिया समाचारों को प्रकाशित प्रसारित कर फाॅलोअप कम ही लिया जाता है या सभी खबरों पर नहीं लिया जाता। लेकिन नागरिक पत्रकारिता उन मुद्दों व विषयों पर फाॅलोअप उपलब्ध कराया जाता है। विभिन्न नागरिक सुविधाओं से संबंधित समस्याओं को लोग डिजिटल मीडिया या सोशल मीडिया के माध्यम से उठाते हैं और उनका समुचित समाधान भी मिल रहा है। कहीं सड़क धंस गई है या नहीं बन पाई है, नाला, पुलिया, पानी निकासी की समस्या, गली-मोहल्ले में गुंडागर्दी, अराजकतत्व, भ्रष्टाचार, विभिन्न प्रमाण-पत्रों को बनाने में बरती जा रही कोताही इत्यादि न जाने कितने ही मुद्दे हैं जिन्हें नागरिक पत्रकारिता के माध्यम से संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के संज्ञान में लाया जा रहा है और समुचित कार्यवाही भी हो रही है। लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा मिल रहा है।
एक ओर जहां नागरिक पत्रकारिता की तमाम खूबियां हैं वहीं इसकी चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अपूर्ण या अपुष्ट समाचारों या खबरों को भी प्रकाशित प्रसारित कर दिया जाता है। फेक न्यूज की भी चुनौतियां हैं। कभी-कभी अफवाहों, प्रोपेगेण्डा का भी शिकार हो जाता है। इसकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते रहते हैं। किसी भी माध्यम की अपनी खूबियां और खामियां होती हैं। नागरिक पत्रकारिता एक ओर जहां नागरिकों को वाक् एवं अभिव्यक्ति का मंच प्रदान करता है वहीं नागरिकों को भी इसका उपयोग बहुत सावधानी, सतर्कता और समझदारी से करने की जरूरत है।
लेखक का परिचयः
डाॅ. गुरु सरन लाल, एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, पत्रकारिता एवं जनसंचार संकाय , भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग (छ.ग.)

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