Article published in Bharat Bhaskar Newspaper on 04.04.2023
लेख
मीडिया एवं सूचना साक्षरताः आवश्यकता एवं महत्व
मीडिया साक्षरता का अर्थ है मीडिया के विभिन्न रूपों और उसकी अन्तर्वस्तु से परिचित होना। मीडिया की अन्तर्वस्तु के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं को पहचानना और समझ के साथ उसका उपयोग करना। वर्तमान सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के युग में जब सूचनाओं का विस्फोट हो रहा है। सूचनाओं का प्रबंध एक मुश्किल कार्य हो चला है। ऐसे में फेक न्यू, अफवाह, प्रोपेगेण्डा इत्यादि की पहचान कर सही समाचार व जानकारी को प्राप्त करना एक कला होने के साथ-साथ एक जागरूक नागरिक होने की पहचान है। यह बड़ी जिम्मेदारी है कि फेक न्यूज, बिना तथ्य की सूचनाओं को फैलने से रोका जाए और समाज में सद्भाव, सहचर्य का माहौल बना रहे, ऐसे प्रयास किये जाएं।
मीडिया एवं सूचना साक्षरता के कई प्रकार हैं जैसे- मीडिया लिटरेसी, सूचना लिटरेसी, फिल्म, टेलीविजन, प्रिंट, ऑडियो-विजुअल लिटरेसी, विज्ञापन, इंटरनेट, कल्चरल, फाइनेंशियल लिटरेसी इत्यादि। अर्थात् हमारे जीवन में उपयोग में आने वाले सभी माध्यमों के बारे में सही जानकारी रखना। जब हम समाचार-पत्र या पत्रिका पढ़ें, कोई फिल्म देखें, रेडियो सुनें या टीवी देखें, सोशल मीडिया या इंटरनेट पर कोई सामग्री देखें तो हम क्या कहा जा रहा है उसे विश्लेषणात्मक तरीके से समझ सकें। ‘रीड बिटवीन द लाइन’ अवधारणा की आज बहुत ज्यादा जरूरत है। यह मीडिया व सूचना साक्षरता से संभव है।
मीडिया व सूचना साक्षरता ऐसी क्षमता है जिसमें हम सूचनाओं को प्राप्त करते हैं, उनका विश्लेषण, मूल्याकन करते हैं। सही और गलत सूचना व समाचार की समझ विकसित होती है। न्यूज और फेक न्यूज का अन्तर पता चलता है। समाचार-पत्र, पत्रिकाओं, रेडियो, टेलीविजन, फिल्में, इंटरनेट, सोशल मीडिया इत्यादि के बारे में एक बेहतर समझ बनती है। एक आलोचनात्मक सोच विकसित होती है। एक तार्किकता की समझ आती है। विभिन्न पाइन्ट ऑफ व्यू को समझने में मदद मिलती है।
मीडिया और सूचना साक्षरता से हम न केवल एक बेहतर पाठक, श्रोता, दर्शक और यूजर बनते हैं बल्कि एक अच्छे उपभोक्ता बनते हैं। उत्पादों के चयन में आसानी होती है। एक वाजिब तर्क होता है। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का उपयोग बेहतर जीवन जीने में कर पाते हैं। साथ ही सतत् विकास के लिए भी मीडिया और सूचना साक्षरता का होना बहुत जरूरी है।
द्वितीय विश्व युद्व के समय प्रोपेगेण्डा शब्द अस्तित्व में आया। उस समय आज की अपेक्षा संचार के माध्यम बहुत कम थे और गति बहुत धीमी थी। आज सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के युग में जहां सूचनाओं को मात्र एक क्लिक पर हजारों-लाखों लोगों तक बहुत तीव्र गति से पहुंचाया जा सकता है ऐसे में सूचनाओं के चयन और प्रस्तुतिकरण में बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है। साथ ही पाठकों, श्रोताओं और दर्शकों को मीडिया व सूचना साक्षर होना अनिवार्य हो गया है। आज लड़ाई सूचनाओं की है। आज सूचना साम्राज्यवाद का युग है। जिस देश के पास जितनी अधिक सूचनाएं वह उतना ही समृद्ध देश माना जाता है।
संचार शास्त्री मार्शल मैकलुहान ने ‘माध्यम की संदेश है’ की अवधारणा दी थी। उन्होंने टेलीविजन के दर्शकों पर अपना शोध किया और पाया कि लोगों के पास यदि समय है तो वे टेलीविजन देखेंगे। उस समय टीवी पर कौन सा कार्यक्रम प्रसारित हो रहा है, इससे ज्यादा मतलब नहीं होता। इस अध्ययन के समय टेलीविजन अत्याधुनिक संचार माध्यम था। मार्शल मैकलुहान की अवधारणा वर्तमान में भी उतनी ही प्रासंगिक है। अत्याधुनिक माध्यम डिजिटल मीडिया या सोशल मीडिया के उदाहरण से इसे समझा जा सकता है। आज जब एक बड़ी ऑडियंस डिजिटल मीडिया या सोशल मीडिया पर शिफ्ट हो रही है, तो ऐसे में जाहिर सी बात है कि मीडिया अन्तर्वस्तु भी वहीं पर ज्यादा मिलेगी। ऐसे समय में मीडिया व सूचना साक्षरता का महत्वपूर्ण बढ़ जाता है।
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लेखकः डाॅ. गुरु सरन लाल
एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, पत्रकारिता एवं जनसंचार संकाय, भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग (छ.ग.), मोबाइल नं. 9425542795, ई-मेलः gurusaranlal@gmail.com

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