- My poem published in Haribhoomi on 13-11-2022
गुरुवार, 9 फ़रवरी 2023
मंगलवार, 27 सितंबर 2022
विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष आलेख
विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष आलेख
ख़्वाजा मीर दर्द का
एक शेर् है -
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल
ज़िंदगानी फिर कहाँ
ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये
जवानी फिर कहाँ
जब बात कहीं घूमने जाने या सैर-सपाटे की
हो तो यानायास ही ये शेर याद आ जाता है. आप विश्व पर्यटन दिवस है और ऐसे मौके पर
ये शेर याद आना लाजिमी है.
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पूरी दुनिया
में प्रत्येक वर्ष 27 सितम्बर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है. इसकी शुरुआत
1980 से हुई.
वर्ष 2022 की थीम है – रीथिन्किग टूरिज्म
अर्थात् पर्यटन पर पुनर्विचार. विगत लगभग तीन वर्षों से कोविड -19 के प्रकोप से
पूरी दुनिया जूझ रही है. इससे सभी क्षेत्र प्रभावित हुए हैं. पर्यटन तो बहुत
प्रभावित हुआ है. अभी भी लोगों में इतना डर है कि लोग आसानी से पहले की तरह पर्यटन
के बारे में नहीं सोच रहे हैं. शायद इसीलिए इस बर्ष इस थीम का चयन किया गया. ताकि
लोग पर्यटन के बारे में फिर से विचार कर सकें. इससे न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा
मिलेगा बल्कि जो लोग पर्यटन उद्योग से जुड़े हुए हैं उनको रोजगार प्राप्त हो सकेगा.
तो अगर आपके पास वक़्त है तो निकल पड़िए कहीं घूमने.
पर्यटन पर निकलने से पहले:
पर्यटन पर निकलने से पहले पूरी तैयारी कर
लेनी चाहिए. जिस जगह जा रहे हैं वहां के मौसम अनुसार कपड़े साथ रखना चाहिए. पैसे
कैश के रूप में रखने के बजाय एटीएम कार्ड रखना ज्यादा सुरक्षित होगा. आने-जाने का
टिकट भी पहले से बुक कर लें. अपने साथ सीमित और आवश्यक सामान ही रखें. याद रखें- जितना
कम सामान रहेगा , उतना सफ़र आसान रहेगा.
फोटो क्रेडिट: गूगल
घूमने कहाँ जायें-
जिसकी जितनी व्यवस्था
हो वह अपनी सुविधानुसार पर्यटन का निर्णय ले सकता है. अपना देश भारत तमाम विविधताओं
से भरा हुआ है. इसकी सांस्कृतिक विविधता को देखना अपने आप में रोमांचक है. इसलिए अपनी
पसंद का कोई स्थान चयन कीजिये और घूम आइये. यकीन मानिये आप पहले से ज्यादा तरोताजा
महसूस करेंगे.
पर्यटन से लाभ:
तो फिर देर किस बात
की. उठाइए अपना बैग
और घूम आइये अपनी किसी मन पसंद जगह पर...
रविवार, 18 सितंबर 2022
आजादी के 75 वर्ष और मीडिया
लेख
आजादी के 75 वर्ष और मीडिया
विगत 15 अगस्त 2022 को भारत देश की आजादी के 75 वर्ष पूरे हो गए हैं। ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अन्तर्गत पूरे वर्ष भर बड़ी धूमधाम से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। आजादी के इन 75 वर्षों में भारत में बहुत परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। परिवर्तन सभी क्षेत्रों में देखा जा सकता है। मीडिया के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहे हैं। लोकतंत्र के चैथे स्तंभ के रूप में मीडिया की जिम्मेदारी विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका से कम नहीं है। स्वतंत्रता पूर्व मीडिया एक मिशन था, लेकिन स्वतंत्रता उपरांत यह प्रोफेशन में बदल गया है। बदलाव जरूरी भी है। मीडिया के रूप, स्वरूप, कंटेंट, प्रस्तुतिकरण, फीडबैक मेकेनिज्म, ऑडियंस सर्वे इत्यादि में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहे हैं। समय के साथ जहां पुराने मध्यमों का प्रभाव कम हुआ है और अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है वहीं नए माध्यमों का प्रादुर्भाव भी हुआ है। इंटरनेट के आविष्कार के उपरांत अस्तित्व में आये ‘न्यू मीडिया’ या डिजिटल मीडिया ने बहुत कम समय में लोगों के दिलों में जगह बना ली है। संचारविद मार्शल मैकलुहान के ग्लोबल विलेज की अवधारणा को साकार करता हुआ न्यू मीडिया बहुत प्रचलित हो गया है और प्रभावी भी। सूचनाओं का बहुत कम समय में बल्कि कहा जाए कि रियल टाइम में अधिक से अधिक लोगों तक सम्प्रेषित करना संभव हो गया है।
पिछले 75 वर्षों में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और फोक मीडिया की अंतर्वस्तु, प्रस्तुति, प्रभाव में परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। एक ओर जहां प्रिंट मीडिया में बेहतर डिजाइन एवं कलर के साथ समाचार सामग्रियां प्रस्तुत की जा रही हैं वहीं इलेक्ट्रानिक मीडिया की अन्तर्वस्तु की प्रस्तुति नये कलेवर व नए कान्सेप्ट के साथ की जा रही है। ये अन्तर्वस्तु लोगों की रूचि व आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। हालांकि सभी माध्यमों के लिए यह कहना उचित नहीं होगा।
विज्ञापन और जनसंपर्क के क्षेत्र में आए बदलावों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि इंटरनेट आधारित अन्तर्वस्तु बढ़ी है। ऑनलाइन विज्ञापन या ई-विज्ञापनों में बेतहासा वृद्धि हुई है। टेक्ट्स, पिक्चर, ऑडियो-विजुअल से सजे हुए ऑनलाइन विज्ञापन लगभग सभी वेबसाइट, वेबपोर्टल, सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहे हैं। इससे एक तरफ जहां लोगों को प्रोडक्ट, सर्विस या आइडिया के बारे में पता चलता है वहीं ये विज्ञापन वेबसाइट या वेबपोर्टल की आय के साधन भी होते हैं। किसी प्रोडक्ट, सर्विस या आइडिया के बारे में ऑनलाइन सर्वे भी संचालित किये जा रहे हैं। जनसंपर्क के क्षेत्र में नये-नये पीआर टूल्स का उपयोग होने लगा है। सोशल मीडिया का भी उपयोग होने लगा है।
मनोरंजन जगत में ओटीटी प्लेटफाॅर्म एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ओटीटी पर वेब सीरीज, फिल्में, धारावाहिक, कार्टून फिल्में इत्यादि सामग्रियां उपलब्ध हैं। लोग अपने स्मार्टफोन या टीवी पर इन सामग्रियों का आनंद ले रहे हैं।
वर्तमान समय में सोशल मीडिया व डिजिटल मीडिया से नागरिक पत्रकारिता को बढ़ावा मिला है। साथ ही आम लोग भी समाचार सामग्रियों, समसामयिक विषयों व घटनाओं पर अपनी राय रख रहे हैं। खबरों का फाॅलोअप भी बढ़ा है। जिन मुद्दों व विषयों को मुख्यधारा की मीडिया नजरअंदाज करती है या कवरेज नहीं करती उन पर भी सोशल मीडिया के माध्यम से लोग अपनी बात रखते हैं।
लेखकः डाॅ. गुरु सरन लाल
गुरुवार, 15 सितंबर 2022
अभियंता दिवस पर विशेष
देश व समाज को और अधिक सुविधायुक्त बनाने, जीवन को सरल-सुगम बनाने और
सतत विकास की अवधारणा को साकार करने में एक इंजीनियर की बहुत बड़ी भूमिका होती है। स्मार्ट फोन, एटीएम, मेट्रो ट्रेन, अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त बस इत्यादि न जाने कितने ही निर्माण/आविष्कार इंजीनियरों द्वारा किया गया है।
आज अभियंता दिवस पर डॉ. एम. विश्वेश्वरैया की स्मृति को सादर नमन।
अपनी कल्पना से एक इंजीनियर की पेंटिंग बनाई है प्यारी बेटी एंजल ने।
लोकतंत्र को सशक्त बनाने में मीडिया की भूमिका
गुरुवार, 8 सितंबर 2022
08 सितम्बर : विश्व साक्षरता दिवस पर विशेष
शुक्रवार, 3 जून 2022
03 जून : विश्व साइकिल दिवस पर विशेष : साइकिल और सतत विकास
शनिवार, 2 नवंबर 2019
मेरी पहली प्रकाशित पुस्तक





